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"कामकला- वटी"
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जोकि वीर्य को मक्खन की तरह गाढ़ा करती है, शीघ्रपतन में रामबाण औषधि है। इसके ईलावा बार- बार पेशाब आना, पेशाब में धातु- जाना, स्वप्नदोष व शूगर के कारण आई कमजोरी में भी लाभदायक है। इसमें बोहड़ के पत्तों का घनसत्व, मोती पिष्टी, चाँदी भस्म, वंग भस्म, छोटी ईलायची के बीज व तवासीर (वंशलोचन) जैसी औषधियों का मिश्रण है।
"सुखदर्शन- वटी"
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जोकि बुढ़ापे में भी ताकत व जवानी का एहसास करवा देती है। कई कारणों से लिंग में उतेजना कम होकर संभोग में रूचि खत्म हो जाती है। अगर ऐसी परिस्थिती में मर्द संभोग रचाता भी है, तो बीच में ही उतेजना कम हो जाती है। इन सब परिस्थितियों में "सुखदर्शन- वटी" गजब का रिजल्ट देती है। इसमें पड़ने वाले घटकों में गंधक, पारा, अभ्रक भस्म, ताम्र भस्म, खुरासानी आजवायन व भीमसैनी कपूर इत्यादि औषधियों का मिश्रण है। आजकल इन दोनों औषधियों का दो तीन महीने सेवन जरूर करना चाहिये।
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धन्यावाद।
आपका अपना,
चहल ओशो आयुर्वेदा, बबनपुर (रतिया)
वैध— आर एस चहल 9992473596.
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