नमस्कार दोस्तो।
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आजतक के तजुर्बे में मैनें जो पाया है वह शेयर कर रहा हूँ, कि जब भी आप किसी रोग के लक्षण को पकड़कर ईलाज करोगे, तो आपको बहुत जल्दी हाथ लगेगी।
पहला केस:—
रोगी नौजवान था, लिंग में उतेजना बिल्कुल नहीं थी, गर्मी की अधिकता थी। दवाई कई जगह से ले चुका था, लेकिन तनाव नहीं आया।
मैनें काऊँसलिंग की सिर्फ स्वर्णमाक्षिक व मंडूर भस्म का मिश्रण खाने को दिया। कोई महंगी दवा नहीं दी गई। यह दवा प्रहेज के साथ लेने को कहा तो 20 दिन बाद पूरी समस्या हल हो गई।
दूसरा केस:—
इस रोगी को शीघ्रपतन की समस्या थी, लीवर कमजोर थी। आऊट आफ कंट्री रह रहा था गर्म देश था, मैने शीघ्रपतन का तीन महीने का कोर्स भेजा। एक महीने बाद फोन आया कि समस्या तो काफी हो गई है। देखने मात्र से ही वीर्य निकल जाता है, मैनें कहा सबर से दवाईयाँ लो, तीन महीने में ठीक होगा, क्योंकि वीर्य गाढ़ा होने में समय लगता है। चौथे महीने अपने दोस्त की समस्या के बारे में पूछने के लिये उसी रोगी ने फोन किया, तो मैनें पूछा कि पहले तुम्हारी समस्या के बारे में बताओ। तो उसने कहा कि शीघ्रपतन की मेरी समस्या अब बिल्कुल सही है। पहले सोचते ही वीर्यपात हो जाता था। अब ऐसा बिल्कुल नहीं है।
तीसरा केश:—
एक नौजवान लड़का शारीरिक रूप से बिल्कुल तंदरूस्त था, लेकिन संभोग करते समय लिन्ग में ढ़ीलापन आ जाता था। देखने मात्र से व काऊँसलिन्ग करने से पता चला कि मानसिक तौर पर कमजोर है। दिलो- दिमाग पर कोई बात लग गई है। मैनें हौंसला दिया कि चिन्ता न करें। एक महीने के लिये नाग भस्म व कुछ अन्य दवाईयों का काँबिनेशन बनाकर दिया। एक महीने बाद फोन पर बताया कि अब पूरी तरह तंदरूस्त हूँ। लिन्ग में ढ़ीलापन नहीं आता। जिन्दगी में खुशी दोबारा आ गई।
जब कोई रोगी ठीक होकर सच्चे मन से दुआएं देता है तो
एक डाक्टर या एक वैध के लिये इससे बड़ी खुशी की बात हो ही नहीं सकती। दूसरी बात ये है कि जो लोग कहते हैं कि सैक्स की दवायें ज्यादा मेंहगी होती हैं, उनके अंदर सैक्स- स्पैशलिस्टों ने एक डर पैदा कर रखा है। इसीलिये उन सबसे निवेदन है कि आप समस्या से डरें या भागें नहीं। अपनी समस्या किसी अच्छे वैध या डाक्टर को खुलकर बतायें।
धन्यावाद।
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आपका अपना,
चहल ओशो आयुर्वेदा, बबनपुर (रतिया)
वैध— आर एस चहल,
मो.नं. 9992473596,
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